भाई के साथ बीवी की रंगरलियाँ

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प्रेषक : वरुण
दोस्तो मेरा नाम वरुण है मेरी उम्र 26 साल है मेरी बीवी का नाम सुधा है उसकी उम्र 24 साल है और वो दिखने मे काफ़ी सुन्दर है रंग गोरा और भरा हुआ शरीर है मेरी शादी को तीन साल हो चुके है हम अपनी शादी की लाइफ से काफ़ी खुश थे हमारी फेमिली मे सिर्फ़ में और मेरी वाईफ ही है वैसे तो मेरी पूरी फेमिली मे और भी लोग है पर वो अलग हमारे घर के पास मे ही रहते है जिसमे मेरे बड़े भाई और उनकी फेमिली और मेरी माँ रहती हैं ये घटना आज से तीन महीने 1 साल पहले की है बरसात का टाइम था और सुबह से ही काफ़ी बारिश हो रही थी में ऑफीस पहुँचा तो पता चला की आज बॉस नही आये हैं और ऑफीस का भी काफ़ी कम स्टाफ आया था.

मैने भी रजिस्टर में एंट्री करी थोड़ा इधर उधर का काम निपटाया और घर के लिए रवाना हो गया जैसे ही में घर पहुँचा तो देखा की भैया की गाड़ी बाहर खड़ी है तो मैं घर के करीब गया तो अंदर से अजीब सी आवाज़े आ रही थी मेरे मन मे शक पैदा हो रहा था तो मैने चुपके से पीछे के दरवाजे से अंदर गया और देखा की मेरे बेडरूम की लाइट जल रही थी और वहा से कुछ लोगो की आवाज़ आ रही थी में बेडरूम के करीब गया और खिड़की का पर्दा हटा कर देखा तो मेरे होश उड़ गये सुधा को भैया ने अपनी बाहों मे ले रखा था और वो उसके शरीर के अंगो को सहला रहे थे ये देख कर मेरा तो खून खोल उठा पर मैने अपने आप को रोका और देखने लगा की ये लोग आगे क्या करते हैं.

फिर मैने देखा की भैया सुधा से कह रहे थे की जान आज मुझे उस दिन की तरह मत तड़पाना उस दिन तो सिर्फ़ तुमने अधूरा ही छोड़ दिया था पर आज मैं पूरे मज़े लेकर जाऊंगा और आज मौसम भी हसीन है और आज हम दोनो के अलावा यहाँ कोई भी नही है तो सुधा ने मुस्कुराते हुये कहा की क्या भाभी आपको नही देती तो भैया ने कहा की जान उसमे वो बात कहा है तो सुधा ने कहा की मुझमे ऐसी क्या बात है तो भैया ने सुधा के बूब्स को दबाते हुये कहा की जान ये तुम्हारे पपीते जैसे बूब्स तुम्हारी मस्त भरी हुई गांड और तुम्हारी मखमली चूत का नशा तो किसी को भी दीवाना बना सकता है.

सुधा ने भैया के लंड पर हाथ फेरते हुये कहा आपका भी ये 10 इंच लंड तो किसी भी औरत को दीवाना बना सकता है फिर भैया ने सुधा की साड़ी उतार दी और फिर सुधा का ब्लाउज और पेटीकोट भी उतार दिया अब सुधा आधी नंगी भैया के सामने खड़ी थी और सुधा ने भैया से कहा की सिर्फ़ मेरे ही कपड़े उतारोगे की अपने भी लंड महाराज के दर्शन करवाओंगे तो भैया ने भी अपने सारे कपड़े उतार दिये उनके कपड़े उतरते ही उनका लंड हवा मे झूलने लगा में तो उनका लंड देख कर हैरान था कम से कम 10 इंच लंबा और 3 इंच मोटा होगा उसे देख कर में ये सोच मे पड़ गया की सुधा इतना मोटा लंड लेगी कैसे फिर सुधा ने अपने गोरे और मखमली हाथो मे भैया का विशालकाय लंड थाम लिया.

फिर भैया ने पहले तो ब्रा के उपर से ही सुधा के बूब्स दबाये फिर ब्रा का हुक खोलकर उसे आज़ाद कर दिया अब भैया के सामने सुधा के गोरे और मोटे बूब्स हवा मे झूल रहे थे और फिर सुधा ने खुद ही अपनी पेंटी उतार फेंकी अब वो दोनो एकदम नंगे एक दूसर के सहारे खड़े थे हल्की रोशनी मे सुधा का जिस्म एकदम किसी अप्सरा जैसा लग रहा था उन दोनो का ये खेल देख कर मेरा भी लंड खड़ा हो गया था उधर भैया अपने एक हाथ से सुधा के बूब्स दबा रहे थे तो दूसरे हाथ से अपनी एक उंगली से सुधा की चूत में अन्दर बाहार कर रहे थे और सुधा आआहा आह…आ की आवाज़ निकाल रही थी फिर भैया ने सुधा का एक बूब्स अपने मुँह मे ले कर चूसने लगे और सुधा भैया के लंड को हाथ से मसल रही थी.

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फिर काफ़ी देर चूसने के बाद भैया ने सुधा से लंड चूसने का आग्रह किया तो सुधा घुटनो के बल बैठ गयी और भैया के लंड पर जीभ फेरने लगी और फिर उसे मुँह मे ले लिया भैया का लंड सुधा के मुँह मे सही से नही आ रहा था पर फिर भी वो उनके टोपे को चूसने मे लगी हुई थी काफ़ी देर तक चूसने के बाद भैया ने उसे उपर उठाया और फिर एक ज़ोरदार फ्रेंच किस जड़ दी और सुधा की चूत पर हाथ फेरते हुये कहा की अब ये पूरी तरह तैयार हो गई फिर भैया ने सुधा को बेड पर लेटाया और अपने लंड पर थोड़ा सा थूक लगाया और सुधा की दोनो टाँगे उपर उठाई और उसकी चूत के मुँह पर अपना लंड रख कर एक ज़ोरदार धक्का मारा पर लंड ज़्यादा मोटा होने के कारण फिसल गया भैया ने फिर से उसे सुधा की चूत पर लगाया और फिर से एक ज़ोरदार धक्का मारा तो भैया का टोपा सुधा की चूत मे चला गया और सुधा के मुँह से ज़ोरदार चीख निकली पर भैया कहा रुकने वाले थे भैया धक्के पर धक्के मारते गये और सुधा चीख रही थी.

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काफ़ी देर बाद सुधा की आवाज़ ठंडी पड़ती गई और उसके मुँह से सिसकारीयां निकलने लगी भैया काफ़ी जोर के धक्के लगा रहे थे थोड़ी देर बाद सुधा भी नीचे से अपनी गांड हिला हिला कर भैया का साथ देने लगी और कहने लगी की और ज़ोर से पेलो जेठ़ जी और ज़ोर से आज कोई कसर मत छोड़ना कई सालो से ऐसी चुदाई के लिए तरस रही हूँ इधर उन दोनो की ये लीला देख कर मेरा खून तो खोल रहा था। पर मज़ा भी आ रहा था में बाहर ही अपने लंड को हाथ मे लेकर मूठ मारने लगा उधर काफ़ी देर की चुदाई के बाद भैया ने अपनी स्पीड बड़ा दी तो में समझ गया की अब वो झड़ने वाले हैं मैं जानता था की इस बीच सुधा कम से कम दो बार झड़ चुकी होगी और फिर भैया ने अपना सारा माल सुधा की चूत मे ही झाड़ दिया और वो दोनो एक दूसरे की बाहों मे नंगे ही लेटे रहे सुधा ने भैया के होठो पर एक ज़ोरदार किस की और वो दोनो ऐसे ही चिपके रहे और बाते करने लगे.

इस बीच भैया सुधा के बूब्स से खेल रहे थे तो सुधा भैया के मुरझाये हुये लंड को सहला रही थी तो भैया ने कहा की सुधा तुम्हारे मुलायम हाथो मे तो जादू है तुमने तो मेरे लंड को फिर से खड़ा कर दिया अब की बार में तुम्हारी गांड मारूँगा तो सुधा ने कहा की ना बाबा ना जेठ़ जी आप चाहो तो मेरी चूत जितनी बार चाहो मार लो पर में गांड नही मरवाउंगी बहुत दर्द होगा और आपका लंड तो वैसे ही बहुत बड़ा है तो भैया ने कहा जान कुछ नही होगा में बहुत आराम आराम से करूँगा और भैया ने सुधा की गांड पर हाथ फेरते हुये उसे घोड़ी बनने के लिए कहा और वो घुटनो के बल घोड़ी बन गई फिर भैया ने अपने लंड पर दुबारा से थूक लगाया और थोड़ा सा थूक सुधा की गांड के गुलाबी छेद पर लगाया और उस पर अपना लंड टच किया और इस बार ज़ोरदार धक्का मारा की लंड सुधा की गांड को चीरता हुआ चला गया.

भैया का आधे से ज्यादा लंड सुधा की गांड मे समा गया और सुधा ज़ोर से चीखी उसकी आँखो से आसूं आ गये पर भैया धक्के पर धक्का मारते रहे सुधा बहुत चीख रही थी इतना तो वो सुहागरात वाले दिन भी नही चीखी थी काफ़ी देर बाद उसे थोड़ा आराम पहुँचा और वो भी भैया का साथ देने लगी भैया खूब जोर से सुधा की गांड मार रहे थे पूरे कमरे मे पटा पट की आवाज़े आ रही थी और करीब 35 मिनिट सुधा की गांड मारने के बाद भैया ने अपना लंड बाहर निकाला और सुधा के मुँह की और ले गये तभी उसमे से पिचकारी जैसा भैया का माल निकला और कुछ उसके मुँह मे गया तो कुछ सुधा के बूब्स पर गिरा सुधा ने भी भैया का लंड चूस के साफ किया और सुधा को अपनी बाहों मे भर लिया.

उस दिन भैया ने सुधा को 5 बार चोदा और जिसमे 2 बार उसकी गांड मारी और 3 बार उसकी चूत मारी करीब सुबह 10 बजे से शाम के 5 बजे तक उन्होने जम कर सुधा को चोदा और सुधा ने कहा की अब जाइये उनके ऑफीस से आने का समय हो गया है अब तो में तुम्हारी हूँ जब चाहे आ कर चोद लेना फिर भैया ने अपने कपड़े पहने और बाहर आने लगे में जल्दी से उनसे पहले ही पीछे के दरवाजे से बाहर चला गया और फिर वो चले गये थोड़ी देर बाद में घर आया तो मैने उससे कुछ नही कहा और नॉर्मल ही था अब तो रोज भैया सुधा को मेरे ऑफीस जाने के बाद चोदते हैं और वो लोग समझते हैं की में यह सब नही जानता और मैं भी उन दोनो के साथ नॉर्मल ही रहता हूँ। दोस्तो ये मेरी सच्ची कहानी है ..

धन्यवाद …

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