कुंवारी चूत और प्यासा लंड


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प्रेषक : सैम …

हैल्लो दोस्तों, कैसे हो आप सभी? मेरा नाम सैम है, आज में एक बार फिर से अपनी एक नयी कहानी को लेकर आया हूँ। अब में आप भी का ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधे अपनी आज की कहानी पर आता हूँ। दोस्तों यह कहानी मेरे घर में आई दूर की दीदी की है, वो बहुत सेक्सी थी और वो मुझ पर मोहित हो गयी थी और अब में भी उसके साथ सेक्स करना चाहता था। एक रात में बाथरूम गया तब मैंने देखा कि दीदी के कमरा खुला हुआ था, उसके कमरे में एक छोटा बल्ब जला हुआ था और उस समय मंजू सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज पहने हुए थी। फिर मैंने देखा कि मंजू का पेटीकोट उसके घुटने के ऊपर तक चढ़ा हुआ था और उसका एक पैर जाँघ तक नंगा था, वो जाग रही थी। अब मैंने पूछा कि दीदी क्या कर रही हो? बहुत गरमी है क्या आपको नींद नहीं आ रही है? तब वो बोली कि हाँ सैम भैया, मुझे नींद नहीं आ रही आप यहाँ मेरे पलंग पर आ जाओ, हम थोड़ी देर बात करते है। अब में उनको पूछने लगा क्या में तुम्हारे पलंग पर आ जाऊँ? तब वो बोली कि हाँ आ जाओ। फिर में तुरंत दीदी के बिस्तर पर चला गया और दीदी के पास में जाकर लेट गया, उस समय में सिर्फ़ शॉर्ट पहने हुए था और ऊपर कुछ नहीं था।

अब मेरे दिमाग में बस एक बात घूम रही थी कि क्या में सही में अपनी दीदी के सुंदर शरीर से खेलूँगा? फिर थोड़ी देर के बाद दीदी मुझसे बोली कि तुम मर्द लोग कितने किस्मत वाले हो, जब तुम लोग चाहो अपने कपड़े उतार सकते हो। अब में तुरंत दीदी से बोला कि तुम्हें कौन रोक रहा है? दरवाजा बंद है और अगर तुम चाहो तो तुम भी अपने कपड़े उतार सकती हो। अब दीदी ने मेरी बात को सुनकर मेरी तरफ करवट बदलकर अपने नंगे पैर मेरे ऊपर चढ़ा दिए और वो मेरी छाती पर अपना हाथ मलने लगी थी। अब मैंने भी अपना एक हाथ दीदी की पीठ पर रखकर उनको अपने बदन से लिपटा लिया था। फिर थोड़ी देर के बाद दीदी बोली कि बहुत गरमी है, लेकिन मुझको कपड़े उतारने में शरम आ रही है। अब में उनको बोला कि इसमे शरमाने की क्या बात है? दरवाजा बंद है और में तुम्हारा छोटा भाई जैसा हूँ। फिर मैंने दीदी से कहा कि मुझसे कैसी शरम? मेरे विचार से अगर तुमको गरमी लग रही है तो तुमको अपने कपड़े उतार देने चाहिए, मैंने दीदी को उकसाया। फिर थोड़ी देर तक दीदी कुछ नहीं बोली, अब में अपना एक हाथ दीदी के नंगे पैर पर रखकर उनके नंगी जाँघ को सहलाने लगा था।

फिर दीदी ने लेटे-लेटे ही अपने ब्लाउज का बटन खोलकर अपना ब्लाउज उतार दिया और दीदी ने ब्लाउज के नीचे सफ़ेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी। अब दीदी को ब्लाउज उतारते देखकर में गरम हो गया था, लेकिन मैंने अपने आप पर काबू रखा। फिर मैंने दीदी से कहा कि मेरे अध्यापक मुझसे हमेशा कहते है कि रात को सोते समय शरीर पर कोई भी कसा हुआ कपड़ा नहीं होना चाहिए। अब दीदी भी कहने लगी कि हाँ भाई मेरी क्लास की लड़कियाँ भी कहती है कि रात को सोते समय ब्रा और पेंटी उतारकर सोना चाहिए, नहीं तो उनका निशान शरीर पर रह जाता है। फिर में दीदी की वो बात सुनकर बोला कि दीदी तब तो तुम्हे भी अपनी ब्रा और पेंटी पहनकर नहीं सोना चाहिए। अब उधर पीछे मेरा एक हाथ दीदी की पीठ से होकर दीदी के कूल्हों तक पहुँच चुका था, मैंने अपने हाथों से दीदी के पेटीकोट को उनके कूल्हों के ऊपर तक खींच दिया था और इस समय मेरा एक हाथ उनकी जाँघ और उनके कूल्हों को सहला रहा था। फिर दीदी मेरी छाती में अपना चेहरा छुपाते हुए बोली कि भाई तुम अपनी माँ से तो नहीं कहोगे कि मैंने तुम्हारे सामने अपने कपड़े उतारे थे? तब में दीदी के कूल्हों को अपने हाथ से पकड़कर बोला कि में आपसे पक्का वादा करता हूँ कि में कभी भी माँ या किसी से भी नहीं कहूँगा कि तुमने गरमी की वजह से मेरे सामने अपने कपड़े उतार दिए थे।

अब दीदी ने अपने हाथ पीछे ले जाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया और अपनी ब्रा को उतार दिया। अब दीदी भी मेरी तरह ऊपर के हिस्से से नंगी हो चुकी थी, कमरे की उस हल्की रोशनी में दीदी का गोरा बदन हीरे की तरह चमक रहा था, दीदी के बूब्स बहुत सेक्सी थे और उनकी निप्पल खड़ी थी। अब उस समय दीदी मेरी तरफ करवट लेकर लेटी हुई थी, उनके बूब्स अपने वजन से नीचे की तरह लुढ़क गए थे। अब में अपने आपको दीदी के बूब्स को छूने से रोक नहीं पा रहा था, मैंने अपने एक हाथ को दीदी के कूल्हों से हटा लिया और अपनी दो उंगलियों के बीच में दीदी की एक निप्पल को ले लिया। दोस्तों दीदी के बूब्स तो बड़े आकार के थे, लेकिन उनके निप्पल छोटे-छोटे थे और उनकी निप्पल का घेरा भी बहुत मोटा था, उनकी निप्पल का आकार करीब छोटी मूँगफली के समान था। फिर मैंने दीदी की निप्पल को अपनी दो उंगलियों के बीच में लेकर ज़ोर से दबा दिया, तब दीदी सिसकी लेते हुए बोली कि आउच भाई दर्द होता है, धीरे-धीरे सहलाओ। फिर में अपनी दीदी की बात मानकर उनकी निप्पल को धीरे-धीरे से सहलाने लगा और फिर उनके पूरे बूब्स को अपने हाथ में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगा था।

अब दीदी के बूब्स को सहलाते हुए मैंने दीदी से पूछा दीदी क्या पहले कभी किसी ने ऐसे आपके बूब्स को दबाया है? क्यों मज़ा आ रहा है ना? तब दीदी सिसकियाँ भरती हुई बोली कि मुझे बहुत मज़ा आ रहा है, पहले कुछ लड़को ने कपड़े के ऊपर से मेरे बूब्स दबाए थे, लेकिन उसमें मुझे इतना मज़ा नहीं आया था, लेकिन आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है, हाँ तुम ऐसे ही इनको दबाते रहो। फिर में अपने पेट के बल लेट गया और दीदी के दोनों बूब्स को अपने हाथों में लेकर धीरे-धीरे दबाने लगा और सहलाने लगा था। फिर दीदी अपने बूब्स दबवाते हुए मुझसे बोली कि भाई तुमने तो मुझे बिल्कुल ही पागल कर दिया है, मेरे पूरे बदन में आग जल रही है, मेरे शरीर की गरमी अब और भी बढ़ गयी है। फिर मैंने अपने दोनों हाथों को दीदी के कंधो के नीचे ले जाकर दीदी को अपने से चिपका लिया और अब दीदी ने भी अपना बदन मुझसे सटा लिया था। अब दीदी के दोनों बूब्स मेरी छाती से दब रहे थे और मुझे उनकी गरमी का एहसास हो रहा था। फिर मैंने दीदी के होंठो को अपने होंठो से लगाकर बहुत कसकर चूमा और अपने एक हाथ से दीदी के एक बूब्स को पकड़कर सहलाते हुए अपना दूसरा हाथ दीदी के शरीर पर फैरने लगा था। दीदी का बदन बहुत चिकना था और अब में एक जवान लड़की के बदन को सहला रहा था।

अब में अपना एक हाथ दीदी के शरीर के निचले हिस्से में ले जाने लगा था, तब मेरा हाथ दीदी के पेटीकोट पर जाकर रुक गया और उधर में दीदी के होंठो को भी चूम रहा था। फिर मैंने पहले दीदी के पेटीकोट के नाड़े में अपना हाथ फैरा और फिर मैंने धीरे से उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और फिर उनके पेटीकोट के नाड़े को खोलकर उसको दीदी की जांघो के नीचे सरका दिया। अब मेरा हाथ दीदी की कोरी बिना चुदी गरम चूत के ऊपर था, दीदी की चूत पर झाटे थी, लेकिन वो मेरे हाथों को रोक नहीं पा रही थी और मेरा हाथ दीदी की चूत के होठों को छूते हुए दीदी की चूत के दरवाजे में घुस गया था। फिर जैसे ही मेरी उंगली दीदी की चूत के अंदर गयी, दीदी की जांघे अपने आप खुल गयी और अब मेरी उंगली ठीक तरीके से दीदी की चूत में अंदर बाहर होने लगी थी। अब दीदी ने मेरे मुँह को अपने बूब्स पर कसकर दबा लिया था और अपनी जांघो से मेरे हाथ को दबा लिया था और छटपटाकर बोलने लगी कि भाई उसको मत छुओ नहीं तो में संभाल नहीं पाऊँगी। अब तुम बस मेरी जाँघो और कूल्हों को सहलाओ, लेकिन अपना हाथ वहाँ से हटा लो, लेकिन फिर भी मैंने अपना हाथ दीदी की चूत पर रखे रखा और दीदी से पूछा कि दीदी तुम इसको क्या बोलती हो? तब दीदी चुप रही।

अब में दोबारा से पूछने लगा कि बोलो नहीं तो में फिर से अपनी उंगली अंदर डाल दूँगा। तब दीदी बोली कि चूत और मुझे अपने से सटाकर ज़ोर-ज़ोर से चूमने लगी थी। फिर मैंने दीदी की चूत पर से अपना हाथ हटा लिया और उनकी जाँघो को सहलाते हुए में दोबारा से अपना एक हाथ उनके बूब्स पर ले गया और अब में उनकी निप्पल से खेलने लगा था। अब दीदी भी अपने हाथ मेरे शरीर पर फैरने लगी थी, दीदी का एक हाथ मेरी पेंट तक पहुँच गया था। फिर दीदी मेरी पेंट के ऊपर अपना हाथ रखते हुए बोली कि भाई तुमने मुझे बिल्कुल नंगा कर दिया और खुद पेंट पहनकर बैठे हो, तुम भी अब इसको खोल दो। अब दीदी को तसल्ली नहीं हो रही थी, उन्होंने अपने हाथों से मेरी पेंट के बटन खोलकर मेरी पेंट को मेरी जांघो से नीचे कर दिया। अब हम भाई-बहन दोनों के दोनों नंगे थे और में दीदी के बूब्स से खेलते हुए उनसे बोला कि दीदी तुम बहुत सुंदर हो, में तुम्हें ठीक से रौशनी में देखना चाहता हूँ और फिर मैंने उठकर कमरे के बल्ब को जला दिया और फिर से बिस्तर पर अपनी नंगी दीदी के पास आ गया था। अब दीदी उजाले में शरमाते हुए अपने पेट के बल लेट गयी थी और अपने चेहरे को अपनी हथेलियों में छुपा लिया था। अब कमरे की रोशनी में दीदी का रंग बिल्कुल दुधिया लग रहा था और वो बहुत ही सुंदर लग रही थी।

फिर मैंने अपना एक हाथ दीदी के कंधो पर रखा और उनको सहलाने लगा था। फिर मैंने अपना एक हाथ दीदी की पतली कमर से होते हुए उनके गोल-गोल भरे हुए कूल्हों, चिकनी जांघो से होते हुए उनके पैर तक अपना हाथ फैरा। फिर मैंने दीदी के सुंदर शरीर के एक-एक इंच पर अपना हाथ फैरा और चूमा और बड़ा मस्त मज़ा लिया। अब मेरी नजर घड़ी पर गयी, तब मैंने देखा कि रात के दो बज रहे थे इसका मतलब था कि में करीब पिछले दो घंटों से दीदी के शरीर से खेल रहा था। फिर मैंने अपनी दीदी को पीठ के बल लेटा दिया और कमरे की रोशनी में उनको देखने लगा था। अब दीदी नंगी होकर मेरी नजरों के सामने लेटी हुई थी और उनका नंगा शरीर दुनियाँ की सबसे अच्छी चीज लग रही थी। उनके बूब्स करीब 36 इंच, पतली कमर, सपाट पेट, हल्के भूरे रंग की झाटो से ढकी हुई उनकी चूत, उनकी जांघे ना ज्यादा मोटी ना बिल्कुल पतली, बिल्कुल ठोस और बिल्कुल चिकनी थी। अब दीदी इस समय अपनी आंखे बंद करके अपने दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर अपनी दोनों जांघे दोनों तरफ फैलाए हुए थी और अपने छोटे भाई को अपने नंगे रूप का दर्शन करवा रही थी। फिर में उनके पास लेट गया और अपने लंड को देखने लगा था और इस समय मेरा लंड खड़ा होकर सात इंच लंबा हो गया था।

फिर मैंने अपना लंड दीदी के हाथों में दे दिया, दीदी ने मेरा लंड अपने हाथों में कसकर पकड़ लिया और अपनी आंखे खोल ली। फिर दीदी मेरी तरफ देखती हुई मुझसे बोली कि भाई मेरे बूब्स और घुंडी को मसलो। अब में अपने दोनों हाथों में उनकी निप्पल को मसलने लगा और दीदी अपने हाथों में मेरे लंड को पकड़कर सहला रही थी। फिर दीदी मेरे लंड को रगड़ते हुए मुझसे बोली कि तेरा लंड तो बहुत बड़ा है, भाई क्या तुमने किसी को कभी चोदा है? अब में दीदी की बातों को सुनकर समझ गया था कि अब दीदी भी गरम हो गयी है और वो खुले शब्दों में लंड, चूत और चुदाई की बातें कर रही है। फिर में दीदी के बूब्स को मसलते हुए बोला कि दीदी आज पहली बार तो तुम्हारे मस्त बूब्स और चूत देखी है, मुझ बच्चे से कौन चुदवाएगी? तब दीदी बोली कि तेरा लंड तो बहुत मस्त है, तू तो किसी भी चूत को फाड़ सकता है। अब दीदी की वो बात सुनकर मैंने धीरे से दीदी के कान में कहा कि दीदी क्या तू मुझसे चुदवाएगी? तब दीदी बोली कि आज नहीं बाद में देखूँगी, अभी तो मेरे बूब्स का मज़ा ले लो। फिर में दीदी को चूमते हुए बोला कि दीदी चुदवाओगी नहीं तो कम से कम लंड को चूत पर रगड़ने तो दो, में वादा करता हूँ कि में चोदूंगा नहीं।

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अब दीदी मेरी तरफ देखते हुए मुस्कुराकर बोली कि देख चोदना मत, मेरे पैरों के बीच में आ जा। दोस्तों में तो इसी घड़ी का इंतजार कर रहा था, दीदी इस समय जवानी की गरमी से गरम थी और में समझ रहा था कि अगर मैंने अपना लंड दीदी की चूत में डाल दिया, तो मेरी दीदी खुशी-खुशी उसको अपनी चूत में डालने देगी, लेकिन में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता था और जानता था कि आज दीदी ने मुझे अपने शरीर का आनंद उठाने दिया, तो कल वो मेरे लंड को अपनी कसी झाटो से ढकी चूत में डलवाने के लिए भी खुद ही कहेगी। अब में उनकी दोनों खुली जांघो के बीच में बैठ गया, मेरे बैठते ही उन्होंने अपनी दोनों जांघो को और भी फैला दिया था और अब में उनकी चूत को अपने एक हाथ में लेकर मसलने लगा था। फिर दीदी मेरी तरफ देखती हुई मुस्कुराकर बोली कि देख तुने वादा किया है कि तू मुझे नहीं चोदेगा और फिर दीदी ने अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ लिया और मुझे चुपचाप बैठे रहने के लिए बोली। अब दीदी अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़कर अपनी चूत के ऊपर रगड़ने लगी थी, वो धीरे-धीरे मेरे लंड को अपनी चूत के ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर रगड़ रही थी।

फिर पहले तो दीदी कुछ देर तक धीरे-धीरे रगड़ रही थी और फिर थोड़ी देर के बाद उनके रगड़ने की गति बढ़ गयी और उनके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी आहह भैया बहुत मज़ा आ रहा है ऊफफफ। अब में तो बस दीदी की कमर को पकड़कर बैठा हुआ था और दीदी ज़ोर-ज़ोर से मेरे लंड को अपनी चूत के ऊपर रगड़ रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद मुझे दीदी की चूत की चिकनाई मेरे लंड के ऊपर होने का एहसास हुआ, तब मैंने नीचे की तरफ देखा और पाया कि मेरा लंड करीब आधा इंच दीदी की चूत में घुसा हुआ है। अब दीदी के मुँह से सिसकियाँ निकल रही थी और वो बोल रही थी कि आहह ऊह्ह्ह्ह में गयी और अब उनके हाथ एकाएक थम गये, तभी उसी समय मेरे लंड ने भी अपना पानी छोड़ दिया। अब मेरे लंड से पानी निकलते ही दीदी ने मेरा लंड अपनी चूत से बाहर निकाल दिया था और फिर अपने हाथों में मेरे लंड का पानी लिया और उसको अपने पैरों और पेट पर मलने लगी थी। फिर दीदी ने मुझे अपने ऊपर खींचकर लेटा दिया और मुझे अपने हाथों में लेकर चूमने लगी थी और फिर दीदी मुझे चूमते हुए बोली कि धन्यवाद भाई मुझे ऐसा मज़ा कभी नहीं मिला, तुम बहुत मस्त हो और तुम्हारा लंड खाकर कोई भी लड़की या औरत मस्त हो जाएगी, क्यों तुम्हें भी मज़ा आया ना भाई?

तब में भी दीदी को चूमते हुए दीदी से बोला कि दीदी तुम बहुत सुंदर हो और तुम्हारी चूत बहुत ही मस्त है, एकदम ताज़ा माल मेरा मन करता है कि हर समय तुम्हारे नंगे बदन को सहलाता रहूँ और तुम्हारी चूत में अपना लंड डालता रहूँ, दीदी तुम एक बार मुझसे जरूर चुदवाना में बहुत मज़ा दूँगा। अब दीदी मुझसे कसकर चिपकते हुए बोली कि आज तो मन भर गया, चुदाई की बाद में सोचेंगे आज तुम मुझसे चिपककर सो जाओ और फिर हम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में भरकर सो गये। फिर जब हमारी आंख खुली तब हमने देखा कि सुबह हो चुकी थी, तब हम दोनों ने जल्दी से अपने-अपने कपड़े पहने और कमरे के बाहर निकल आए। फिर कमरे से बाहर निकलने से पहले दीदी ने मुझसे वादा करवाया कि में किसी को भी कल रात की बात नहीं बताऊँगा। अब मैंने भी दीदी से वादा किया कि में कल रात की बात किसी से भी नहीं कहूँगा और अगली रात को भी अपने कमरे में मैंने और दीदी ने कल रात का हमारा वो खेल वैसे ही जारी रखा। फिर उस रात में बहुत कोशिश करता रहा, लेकिन दीदी ने मुझे मेरा लंड अपनी चूत में डालने नहीं दिया और दीदी अपने हाथों से मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत से लगाकर रगड़ती रही, लेकिन हाँ आज दीदी ने मेरा लंड कल से ज़्यादा अंदर तक लिया था।

अब में भी मन ही मन में यह सोच रहा था कि आज नहीं तो कल में अपनी दीदी की चूत में अपना लंड डालकर उनकी चुदाई जरुर करूंगा। अब दीदी भी बहुत गरमा गयी थी और में यह बात समय चुका था कि अगर में थोड़ी सी कोशिश करूँ, तो दीदी मेरा लंड अपनी चूत में डालने जरुर देगी। फिर एक दिन मेरी दीदी अपनी सहेली की शादी से लौटकर आई और मुझे देखकर मुस्कुराते हुए उसने आँख मार दी। अब में समझ गया था कि अब में अपनी दीदी की चूत में भी अपना लंड डाल सकता हूँ, हम दोनों थोड़ी देर तक बातें करते रहे और रात का खाना खाया। फिर करीब आधे घंटे के बाद मेरे शरीर में एक अजीब सी सरसराहट होने लगी थी और मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरा लंड मेरी पेंट को फाड़ देगा। अब घर के सभी लोग सो चुके थे और फिर में भी अपनी दीदी के साथ सोने के लिए अपने कमरे में चला आया। फिर कमरे में आकर में अपनी दीदी से बातें करने लगा और बातें करते-करते हम दोनों लेट गये, तब दीदी ने मुझे अपने से चिपकाकर मुझे कसकर चूम लिया और बोली कि भाई मैंने तुम्हे कल रात को बहुत याद किया और में आज की रात तुम्हारे कल रात ना होने का सारा बदला ले लूंगी। अब में वो सभी बातें सुनकर तुरंत समझ गया था कि दीदी आज की रात अपने छोटे भाई से अपनी चूत फड़वाएगी।

अब में भी दीदी के बूब्स पर अपना एक हाथ फैरकर दबाकर उनको मस्त कर रहा था और उनके कपड़े उतार रहा था। फिर मैंने दीदी के बदन से चादर को खींच लिया, तब मैंने देखा कि दीदी बिल्कुल नंगी सो रही है। अब चादर खीचते ही दीदी जाग गयी और वो मुझसे लिपटते हुए बोली कि भाई मेरी चुदाई कर, में अपनी चूत की खुजली से बहुत परेशान हूँ, तू आज अपना लंड मेरी चूत में डालकर उसकी ऐसी चुदाई कर कि मेरी चूत की सारी खुजली दूर हो जाए। अब मुझे और क्या चाहिए था? फिर में करीब एक घंटे तक दीदी के सुंदर भरे हुए नंगे बदन से खेलता रहा, जिसकी वजह से दीदी भी बहुत गरम हो चुकी थी और अपने ही हाथों से अपनी चूत में उंगली करने लगी थी। फिर वो मुझसे बोली कि भैया क्यों तुम मुझे इतना सताते हो? अपना मस्त लंड मेरी इस रसीली चूत में डाल दो ना और आज चोद चोदकर फाड़ डालो मेरी इस चूत को। अब देखो तुम्हारा लंड भी और चुदाई करने के लिए तरस रहा है, अब जल्दी करो और मुझे चोदना शुरू करो। अब तक में भी बहुत गरम हो चुका था और फिर में अपना लंड दीदी की चूत के छेद पर रगड़ते हुए दीदी से बोला कि दीदी आप क्यों घबराती हो? अभी तो पूरी रात पड़ी है।

अब में आज तुमको ऐसा चोदूंगा कि तुम्हारी चूत खुल जाएगी और कल तुम ठीक तरीके से चल भी नहीं सकती, लो अब संभालो अपनी चूत को और अब में अपना लंड तुम्हारी चूत में डालता हूँ। तभी दीदी मुझसे लिपटे हुए बोली कि ओह्ह्ह्हह भैया मेरी चूत तो तुम्हारा लंड लेने के लिए खुली की खुली है, तुम अब डालो भी, क्यों इतनी देर कर रहे हो? फिर मैंने दीदी की चूत में अपना लंड एक ही झटके के साथ अंदर डाल दिया और उस समय दीदी आह्ह्ह्ह मार डाला कहने लगी। अब मेरे पहले झटके के साथ ही दीदी की चूत की झिल्ली फट चुकी थी और दीदी दर्द की वजह से छटपटान लगी थी और सिसकियाँ लेते हुए कहने लगी थी आह्ह्ह्ह मेरी चूत फट गयी। अब दीदी इसी बात से डरती थी कि मेरा लंड उनकी चूत को फाड़ देगा और फिर वो कहने लगी कि ओह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह भाई अब तुम इसको बाहर निकाल लो मुझे लगता है कि तुमने मेरी चूत को फाड़ दिया है, मुझे अपनी चूत को देखने दे। फिर में दीदी को चूमते हुए और अपने हाथ से उनके बूब्स को दबाते हुए बोला कि दीदी घबराओ नहीं, तुम्हारी चूत नहीं उसकी झिल्ली फटी है और अब तुम कुंवारी नहीं बल्कि एक चुदी चुदाई औरत बन चुकी हो। अब तुम दिल खोलकर मेरे लंड के धक्के अपनी चूत पर खाओ और अपनी चूत का पानी निकालो और फिर में यह बात उनको कहते हुए दीदी की चूत में अपना लंड लगातार वैसे ही तेज धक्के देकर डालता रहा।

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फिर थोड़ी देर के बाद दीदी को भी मज़ा आने लगा और फिर वो अपने दोनों पैरों को मेरी कमर पर रखकर मुझसे लिपटे हुए बोली वाह भाई मुझे बड़ा ही मस्त मज़ा आ रहा है, तुम मेरी चूत में अपने लंड से ऐसे ही चोट लगाते रहो और अब मेरा सारा बदन हल्का हो रहा है, चोदो हाँ ऐसे ही चोदो भाई और तेज़ी से चोदो, मेरी चूत आज इतने दिनों के बाद अपना पानी छोड़ने वाली है, प्लीज इस समय मत रुकना और ज़ोर-ज़ोर से चोदो आह्ह्ह्ह और अब में झड़ने वाली हूँ। अब में अपना चोदना रोककर दीदी का चेहरा देख रहा था, जो कि इस समय चूत चुदाई की गरमी उस मज़े की वजह से चमक रहा था। फिर मेरे रुकते ही दीदी गुस्से से बोली कि साले, बहनचोद, हरामी इतनी अच्छी चूत तुझे मुफ्त में चोदने को मिल गई तो नखरे दिखा रहा है, चोद साले चोद अपनी दीदी की चूत मार और तेज़ी से मार, साले गांडू रुक क्यों गया? चोद ना अपनी दीदी की चूत अपने लंड के धक्के से। अब में दीदी की बातों को सुनकर उनको आंखे फाड़ फाड़कर देखने लगा था, वैसे दीदी के मुँह से गाली बहुत अच्छी लग रही थी।

फिर दीदी ने अपनी कमर को ऊपर उठा उठाकर मेरा लंड अपनी चूत में दोबारा से ले लिया और वो मुझसे बोली कि मेरे अच्छे भाई क्यों तुम मुझे इतना तड़पा रहा है? और दस धक्के मार और मेरी चूत का पानी निकाल दे, अब में झड़ने वाली हूँ और अब इस समय तू अपनी चुदाई जारी रख और मेरी चूत मार। अब मैंने दीदी की बात को सुनकर दोबारा से दीदी को चोदना शुरू कर दिया था। तभी वो बोली कि भैया ज़ोर से चोदो, मुझे रगड़ दो, इस कोमल कली को मसल दो, साले मेरी चूत को आज तू फाड़ दे और अपनी बहन की चूत का भोसड़ा बना दे, सैम भैया आहह चोदो मुझे आहह मारो मेरी चूत आअहह सैम और फिर में तब तक पेलता रहा, जब तक मेरा और दीदी का पानी नहीं निकल गया। अब दीदी की पहली चुदाई ख़त्म होते ही दीदी मुझे चूमने लगी थी और मुझसे बोली कि भाई अपनी चूत तेरे से चुदवाने में मुझे बड़ा मज़ा आया, सही में तू बहुत ही अच्छा चोदता है, आज मेरी चूत तेरा लंड खाकर धन्य हो गयी है और मुझे ऐसा मज़ा पहले कभी नहीं आया। अब बोल तेरा क्या प्रोग्राम है? सोने का या और कुछ करने का।

अब में दीदी की बात को सुनकर समझ गया था कि दीदी का अपनी चूत पहली बार चुदवाने के बाद भी मन नहीं भरा है और इसलिए मैंने दीदी के नंगे बूब्स पर अपना हाथ फैरते हुए कहा कि दीदी मेरा मन एक चुदाई से नहीं भरा है, में चाहता हूँ कि में एक बार और तुम्हारी चूत में अपना लंड डाल दूँ और कस कसकर धक्के मारते हुए एक बार और चुदाई करूं। अब दीदी ने मेरी बात सुनते ही झट से मेरा लंड पकड़ लिया और मुझसे बोली कि तेरा लंड फड़क रहा है और मेरी चूत भी तेरे लंड को खाने के लिए फड़क रही है, फिर देर किस बात कि? चल फिर से अपनी चुदाई शुरू करते है। अब में दीदी की बात को सुनते ही दोबारा से उनके ऊपर चढ़ गया और उनके बूब्स को अपने दोनों हाथों से पकड़कर चूसने लगा था। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने दीदी के दोनों पैरों को पूरा फैला दिया और मैंने उनके बीच में बैठकर अपने दोनों हाथों से उनकी चूत को फैला दिया और फिर उनकी चूत फैलाने के बाद मैंने दीदी की चूत में अपना मुँह लगा दिया और उनकी चूत को मैंने चूसना शुरू कर दिया था। अब उनकी चूत की चुसाई शुरू होते ही दीदी अपनी कमर को उठाने लगी थी और अपनी चूत मेरे मुँह पर रगड़ने लगी थी।

अब में भी दीदी के दोनों कूल्हों को पकड़कर जितनी दूर तक मेरी जीभ जा सकती है, अपनी जीभ को अंदर डालकर उनकी चूत को चाटने लगा था और चूसने लगा था। अब दीदी अपनी चूत मुझसे चुसवाते हुए थोड़ी देर में ही झड़ गयी। फिर दीदी ने झड़ने के बाद उठकर मेरा लंड अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगी थी। फिर थोड़ी देर के बाद में भी दीदी की मुँह के अंदर ही झड़ गया और दीदी मेरा सारा का सारा रस लंड को चूस चूसकर पी गयी। फिर थोड़ी देर के बाद हम लोग नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सो गये और हम दोनों की चुदाई का यह खेल ऐसे ही चलता रहा और फिर हम दोनों ने चुदाई का भरपूर आनंद लिया और बड़े मस्त मज़े किए।

दोस्तों यह था, मेरे जीवन का पहला सेक्स अनुभव अपनी दीदी के साथ जिसके बाद मेरा पूरा जीवन बदल गया और में अपनी दीदी के साथ जब भी हमारी इच्छा कोई अच्छा मौका मिलता चुदाई का वो खेल खेलने लगे और एक दूसरे का पूरा पूरा साथ देने लगे।

धन्यवाद …

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