पड़ोसन आंटी को बहुत मजे से चोदा

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प्रेषक : मलिक …

हैल्लो मेरे प्यारे दोस्तों, चूत वालियों और लंड वालों में मलिक आप सभी कामुकता डॉट कॉम के चाहने वालों का दिल से स्वागत करता हूँ। दोस्तों आप लोगों की तरह में भी सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके बहुत लंबे समय से मज़े लेता आ रहा हूँ, ऐसा करके मेरे मन को बड़ी शांति मिलती है और आज में पहली बार अपना सच्चा सेक्स अनुभव लिखकर आप सभी तक पहुंचा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आप सभी लोगो को जरुर पसंद आएगी, क्योंकि यह बिल्कुल अलग हटकर मेरे पड़ोस में रहने वाली एक हॉट सेक्सी आंटी के साथ बने मेरे उस सम्बन्ध की घटना है। दोस्तों जिसके बाद मेरा पूरा जीवन बदल गया और अब में ज्यादा आपका समय खराब ना करते हुए कहानी पर आता हूँ। दोस्तों एक बार मेरे पास वाले घर में एक परिवार अभी कुछ महीनों के लिए किराये पर नये नये रहने आया हुआ था। उस परिवार में पति-पत्नी और उनका एक 13 साल का लड़का था, जो उस समय 8th क्लास में अपनी पढ़ाई कर रहा था, लेकिन उनका वो लड़का स्कूल के बोरडिंग हाउस में ही रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा था। फिर उन दिनों वो अपनी कुछ दिनों की छुट्टियों में अपने घर आया हुआ था, उस लड़के के पापा जो की करीब 45 साल के थे और उनकी यह दूसरी शादी थी, क्योंकि उनकी पहली पत्नी किसी बीमारी की वजह से मर चुकी थी, वो एक सरकारी विभाग में काम किया करते थे।


फिर हम दोनों सरकारी नौकर होने की वजह से एक दूसरे के घर आकर हर कभी गप्पे मारा करते थे, या फिर टेबल टेनिस भी खेला करते थे। दोस्तों में उन्हे हमेशा ही अंकल कहकर बुलाता और उनकी पत्नी को में आंटी कहता था और वो अंकल इतनी उम्र हो जाने की वजह से अब अपनी पत्नी को ठीक तरह से चुदाई का सुख नहीं दे रहे थे। दोस्तों वैसे उनकी पत्नी की उम्र भी उनसे कम होने की वजह से वो बहुत जवान सुंदर गोरी होने के साथ साथ बड़ी ही सेक्सी लगती थी, उनके वो बड़े आकार के कुल्हे और बूब्स को देखकर किसी का भी मन उनकी चुदाई करने के लिए तड़प उठता होगा, क्योंकि वो बड़ा ही मस्त माल थी। फिर में हमेशा उनको बड़ा ही चकित होकर देखा करता था और वो भी अक्सर मुझे अपनी सेक्सी नजरों से देखा करती थी। अब मैंने कई बार महसूस किया भी था कि कभी कभी तो मेरी उस आंटी की आंखे मुझे सेक्स से भरी नज़र आती थी और बातें करते हुए वो मुझे देखकर कभी अपने होंठो को भी अपने दाँतों से दबाती थी। फिर वो कभी अपने होंठो पर बार बार अपनी जीभ को घुमाया करती और हर कभी किसी बहाने से मुझे अपने गोरे बूब्स दिखाने के लिए मेरे सामने झुक जाती, में वो द्रश्य देखकर ही बस संतुष्ट हो जाता।


एक दिन बातों ही बातों में उन्होंने मुझसे कहा कि मलिक बेटा फ़हद (उनके लड़के का नाम है) के पापा को तो बिल्कुल भी समय नहीं मिलता और इसलिए अगर तुम्हारे पास समय हो तो शाम को तुम उसको हमारे घर आकर पढ़ा दिया करो, क्योंकि मुझे लगता है कि वो गणित में कुछ ज्यादा कमजोर है। अब मैंने उनको कहा कि हाँ ठीक है, मुझे इसमें कोई भी समस्या नहीं है में शाम को अपने दफ़्तर से आ जाने के बाद उसको पढ़ाने आपके घर आ जाऊंगा। फिर में उस दिन के बाद रोज शाम को अपनी उस सेक्सी आंटी के घर उनके लड़के को पढ़ाने जाने लगा था, इसलिए अब मेरी आंटी से बहुत ज्यादा बातें हंसी मजाक होने लगा था और अब जब भी में उनके लड़के को पढ़ाने बैठता, तब वो भी कुछ देर बाद मेरे पास ही आकर बैठ जाती थी। अब मैंने उसकी तरफ कुछ ज्यादा ही ध्यान देना शुरू कर दिया था और तभी मैंने एक बार महसूस किया कि वो भी अब मेरे सामने बहुत सेक्सी कपड़े पहनने लगी थी। फिर जब कभी वो गहरे गले की कमीज़ पहनती, तब उनका वो गला बहुत ही कसा हुआ होता जिसकी वजह से उनके 40 इंच के बूब्स बड़े ही तने हुए बाहर की तरफ निकले रहते और उनकी वो सलवार भी कूल्हों पर से बहुत कसी हुई रहती थी।


फिर उनके वो बूब्स बहुत ही बड़े आकार के थे, जिसको देखकर ही मेरा लंड बुरी तरह से कड़क होकर खड़ा हो जाता और जब कभी सलवार पहनती तो वो भी बहुत कसी हुई होती थी। फिर उनकी वो कमीज़ गहरे गले की होने की वजह से उनके वो उभरे हुए बूब्स बहुत ही सेक्सी लगते थे और उनकी वो गांड भी एकदम कसी हुई रहती थी। दोस्तों उनकी गांड का आकार 44 इंच था और कमर 34 इंच की थी वो ऊपर से लेकर नीचे तक पूरा का पूरा जबरदस्त माल लगती थी, उनको देखकर हमेशा मेरा मन करता था कि में उनके पास जाकर उनको जबरदस्ती अपनी बाहों में दबोच लूँ और अपना लंड में उनकी गांड और चूत में डालकर उनकी मस्त चुदाई कर दूँ, लेकिन डर की वजह से मेरी इतनी हिम्मत नहीं बढ़ रही थी कि में उनके साथ ऐसा कुछ करूं। दोस्तों अब वैसे उनकी चुदाई करना मेरा एक सपना बन चुका था, में कैसे भी करके उनकी चुदाई एक बार जरुर करना चाहता था और इसलिए में किसी अच्छे मौके की तलाश में था। एक दिन जब में उनके लड़के को उनके घर में पढ़ा रहा था, तब उस समय वो मेरे सामने वाले सोफे पर बैठी हुई थी। दोस्तों उस दिन उन्होंने गुलाबी रंग की सलवार-कमीज़ पहनी हुई थी और उनकी वो कमीज बहुत ही कसी हुई गहरे गले वाली थी।


दोस्तों उस कमीज को देखकर लगता था कि वो आंटी के बूब्स के आकार से बहुत छोटी कमीज़ थी और जिसको उन्होंने शायद जबरदस्ती बड़ी मेहनत से पहना होगा, लेकिन कुछ भी कहो उसमे आंटी का गोरा बदन मुझे अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था। अब में बड़ा ही चकित होकर बार बार उनके बूब्स को देखे जा रहा था, में थोड़ी थोड़ी देर में नजर बचाकर आंटी की छाती पर अपनी नज़र डाल रहा था। फिर यह सब करने में मुझे बड़ा ही अजीब सा मज़ा मिलने लगा और जब कभी मेरी उनसे नज़र भी मिल जाती या मुझे वो अपने बूब्स को घूरते हुए देख लेती, तब वो सिर्फ मेरी तरफ मुस्कुरा देती। फिर उनकी तरफ से मुझे कोई भी किसी भी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ता, उनका यह स्वभाव यह तरीका देखकर मेरी हिम्मत पहले से अब धीरे धीरे ज्यादा ही बढ़ती जा रही थी। एक दिन जब में उनके घर गया तब वो कोई किताब पढ़ रही थी और जैसे ही फोन की घंटी बजी अचानक जल्दबाजी की वजह से उनके हाथ से वो किताब नीचे गिर पड़ी और वो उस किताब को उठाने के लिए नीचे झुकी। अब में अपनी चकित आँखों से देखता ही रह गया वाह क्या गजब का नज़ारा था? एकदम कसे हुए उनके वो दो बहुत ही मोटे मोटे बूब्स अब पहले से भी ज्यादा बाहर निकलकर मेरे सामने थे, क्योंकि आंटी ने अपनी वो कमीज़ बहुत ही गहरे गले की पहनी हुई थी।


फिर उनके बूब्स का वजन भी बहुत होने की वजह से वो लटककर बाहर निकलकर मुझे साफ साफ दिखाई दे रहे थे। अब जब कुछ देर बाद मेरी और उसकी नज़र आपस में मिली तब वो तुरंत समझ चुकी थी कि में बड़े गौर से बस उनके बूब्स को ही घूरकर देख रहा हूँ, लेकिन उस समय भी वो मुझसे बिना कुछ कहे बस मुस्कुराकर अपना काम करने लगी थी। अब इतना सब होने के बाद भी आंटी ने अपना दुपट्टा ऊपर नहीं किया और इसलिए उनके वो कसे हुए मोटे बूब्स कमीज़ से उभरे हुए मुझे साफ नजर आ रहे थे, लेकिन उनको कोई फर्क नहीं पड़ा। फिर वो ऐसे ही बहुत देर तक अपनी किताब को पढ़ती रही और अब वो द्रश्य देखकर मेरे लंड का तो बड़ा ही बुरा हाल हो चुका था। फिर वो कुछ देर के बाद उठकर बाहर चली गयी और में शांत होकर उनके बच्चे को मन लगाकर पढ़ाने लगा और उसके बाद में अपने घर चला आया। अब में उस पूरी रात को ठीक तरह से सो नहीं सका, में बस उनके बारे में ही सोचता रहा और मैंने एक बार उनके नाम से अपने लंड को हिलाकर शांत भी किया और उसके बाद पता नहीं कब में सो गया। फिर में कुछ दिन अपने काम में उलझा होने की वजह से अपनी आंटी के घर ना जा सका और अगले सप्ताह जब में उसके घर गया।
अब मैंने दरवाजे की घंटी को बजाया मेरी उसी सेक्सी आंटी ने आकर दरवाजा खोलकर मुझे अंदर आकर बैठने के लिए कहा, उन्होंने मुझे पानी लाकर दिया। फिर मुझे आंटी से पता चला कि उस दिन उनका लड़का अपने किसी दोस्त के जन्मदिन की पार्टी में गया हुआ था और घर में उस समय आंटी अकेली थी, अंकल को भी अपने किसी काम से कहीं जाना पड़ा उनका भी वापस आने का पता नहीं था। अब इसलिए मैंने आंटी से कहा कि ठीक है तो में अब चलता हूँ। फिर वो मुझसे बड़े ही प्यार भरे अंदाज में बोली कि चले जाना, तुम थोड़ी देर तो मेरे साथ भी रूको कभी मुझे भी तुमसे बात करने कुछ पूछने का मौका दे दिया करो, क्या हमेशा ही अपने कामो में लगे रहते हो? वैसे भी तुम्हारे साथ रहकर मेरा भी मन लग जाएगा वरना आज में घर में बिल्कुल अकेली होकर बोर हो रही थी और मेरा भी इतनी देर से मन नहीं लग रहा था और में बस इतनी देर से तुम्हारा ही इंतजार कर रही थी। अब में उनकी इतनी बातें और इतना कहने की वजह से रुक गया। फिर मैंने मन ही मन में सोचा कि में कुछ देर इनसे बातें करके अपने घर चला जाऊंगा हो सकता है कि मुझे आज भी आंटी जानबूझ कर अपने बूब्स दिखा दे, उन्हें देखकर मेरा मन भी बहल जाएगा और उसमे मेरा क्या जाता है?

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फिर जब वो खुद ही मुझे अपने अंगो का प्रदर्शन करवाकर अपनी छाती दिखा रही है, मुझे फिर देखने में कैसी आपत्ति? अब मैंने अपनी आंटी को ध्यान से देखा उन्होंने आज काले रंग की एकदम टाइट कमीज़ पहनी हुई थी, जो पारदर्शी कपड़े की बनी होने की वजह से उसके अंदर का सब कुछ मुझे साफ साफ नजर आ रहा था, कमीज के अंदर उन्होंने सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी और सफेद रंग की पेंटी पहनी हुई थी। अब उनकी वो पेंटी तो उसके दोनों बड़े आकार के कूल्हों के बीच में एकदम फसी हुई थी। दोस्तों उनको देखकर ऐसा लगता था कि जैसे वो सिर्फ ब्रा और पेंटी में खड़ी, हो यह द्रश्य देखकर मेरा तो लंड पूरी तरह से तनकर खड़ा हो गया था, जो मेरी पेंट के ऊपर से बड़ी आसानी से टेंट बना नजर आ रहा था। अब मेरे लंड का तना हुआ वो उभार साफ नजर आ रहा था और वो भी मेरे लंड को ही बहुत ध्यान से चकित होकर बार बार बातों के बीच में देख रही थी। फिर कुछ देर बाद उन्होंने मुझसे पूछा क्या तुम कुछ लेना चाहोगे? मैंने उनसे कहा कि हाँ आप कुछ ठंडा ला दीजिए और वो तुरंत ही उठकर मेरे लिए ठंडा लाने के लिए चली गई। अब में जाते हुए पीछे से उनके कूल्हों को बड़े ही ध्यान से देख रहा था जो कि अब हर बार इधर उधर मटक रहे थे।
फिर वो मेरे लिए ठंडा लेकर आ गई और मुझे लाकर दे दिया, जैसे ही मुझे देने के लिए वो नीचे झुकी मुझे उनके बूब्स की दरार साफ साफ दिखाई देने लगी। अब में उसको ही घूरकर देखने लगा और उनके हाथ से ठंडा लेना भूल ही गया, लेकिन वो भी मुझसे कुछ नहीं बोली उन्होंने मुझे अपने बूब्स को वैसे ही देखते रहने दिया, क्योंकि उनको अब अच्छी तरह से पता चल चुका था कि में बस उनके बूब्स को ही देख रहा हूँ। फिर कुछ सेकिंड देखने के बाद मुझे होश आ गया, तब मुझे याद आया कि मुझे अपनी आंटी के हाथ से वो ठंडा लेना है और मैंने जल्दी से ले वो लिया। अब वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुराते हुए मुझसे कहने लगी ऊउफ़फ्फ़ मलिक बेटा आराम से ले लो वैसे भी मुझे कोई भी जल्दबाजी नहीं है, तुम आराम से देखो जब मन भर जाए तब अपनी नजर हटा लेना। दोस्तों में अपनी आंटी के मुहं से यह बात सुनकर बड़ा हैरान एकदम चकित हो गया और अब में पूरी तरह से समझ चुका था कि वो भी अब तैयार है। अब उनकी तरफ से मुझे हरी झंडी नजर आ चुकी थी, उनका वो इशारा पाकर में मन ही मन बहुत खुशा था, क्योंकि आज मेरा उनके साथ वो सब करने का एक सपना पूरा होने वाला था।


दोस्तों में उस काम को पूरा करने के बारे में बहुत दिनों से सोचकर विचार बना रहा था, लेकिन इतना सब कुछ मेरे साथ इतना जल्दी होगा, इसके बारे में मैंने कभी नहीं सोचा था? मुझे कुछ देर तक तो बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ। अब वो अपनी जगह से उठकर मेरे साथ में आकर बैठ गयी, जिसकी वजह से मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई और अब मैंने तुरंत ही उनके कंधे पर अपने एक हाथ को रखकर उनके बूब्स को सहलाना और दबाना शुरू कर दिया। अब वो मेरी तरफ मुस्कुराकर देखते हुए अपनी चुन्नी को उतारने लगी और मैंने उनका हाथ पकड़कर उनको रोककर कहा कि अभी नहीं मेरी जान आज में तुम्हे अपने हाथों से नंगा करूँगा। फिर वो कहने लगी कि हाँ यह भी ठीक रहेगा, मुझे नंगा करते समय तुम अच्छे से मेरे इस प्यासे बदन के मज़े बहुत आराम से ले लेना और वैसे भी बड़े दिनों से मेरी चूत बहुत प्यासी है लगता है कि आज मेरे दिल की इच्छा पूरी हो रही है और में भी तुम्हे बड़े दिनों से यह हरकते करते हुए बिना कुछ कहे आगे बढ़ने का मौका दे रही थी। अब आज तुम आगे बढ़ ही गए हो फिर क्यों पीछे हटते हो? कर लो अपने मन का वो काम जिसके लिए आज मैंने तुम्हे यहाँ रोका है।


दोस्तों उसके मुहं से यह सभी बातें सुनकर में बड़ा चकित था, क्योंकि उसको पहले से ही मेरे इरादों के बारे में सब कुछ पता था और अब में भी भला कैसे पीछे हटता? उसका वो बदन बहुत ही गजब का था एकदम मुलायम बड़ा ही चिकना गोरा, मुझे उसको सहलाने में बहुत ही मस्त मज़ा आ रहा था, क्योंकि अब तक बातों ही बातों में मैंने उसकी कमीज़ को उतार दिया था। अब वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और सलवार ही पहने हुए थी वो क्या मस्त गजब का माल लग रही थी। फिर मैंने उसके होंठो को चूमना शुरू किया और साथ ही में उसके बूब्स को भी दबाने लगा था, जिसकी वजह से वो अब धीरे धीरे गरम होने लगी थी। फिर उसने भी मेरी शर्ट और पेंट को बिना देर किए उतार दिया, जिसकी वजह अब में उसके सामने सिर्फ अंडरवियर में था। अब वो चकित होकर मेरे खड़े लंड को देखने लगी जो अंडरवियर से बाहर आ रहा था और मेरे लंड को देखकर बड़ी पागल होकर मुझसे बोली मलिक तुम्हारा लंड तो बहुत ही बड़ा और मोटा भी है। अब आज में तुम्हारे इस लंड को अपनी चूत में लेकर अपनी इस प्यासी चूत की प्यास को बुझा दूँगी और इतना कहकर उसने धीरे से मेरा लंड बाहर निकाल लिया।


फिर वो तुरंत ही नीचे झुककर लंड को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी। दोस्तों उसके ऐसा करने से मुझे भी बड़ा मस्त मज़ा आने लगा था और इसलिए उसी समय मैंने भी धीरे से उसकी सलवार-पेंटी को उतार दिया और फिर उसके बाद ब्रा को भी उतार दिया। अब उस वजह से वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी और वो बहुत ही गजब की लग रही थी। फिर कुछ देर बाद मैंने भी जोश में आकर उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। अब वो बहुत तड़प रही थी और लगातार सिसकियाँ लेने लगी थी, में उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ को डालकर उसकी चुदाई करने लगा था। फिर यह सब करने की वजह से मेरा लंड भी पहले से ज्यादा जोश में आकर तनकर झटके दे रहा था, लेकिन फिर मैंने बिना देर किए अब में उसके ऊपर चढ़ गया और अपने लंड का टोपा मैंने उसकी कामुक गीली चूत के होंठो पर रख दिया। अब में चूत के दाने को अपने लंड से सहलाने लगा और साथ ही ज़ोर ज़ोर से उसके बूब्स को भी दबाने रगड़ने लगा था, जिसकी वजह से वो अब बिन पानी की मछली की तरह तड़पते हुए सिसकियाँ ले रही थी। अब उसके मुहं से यह आवाजे आ रही थी आह्ह्ह आईईई मेरे राजा अब जल्दी से तुम मुझे चोद दो, डालो अपना यह लंड मेरी चूत के अंदर तुम मुझे इतना ना सताओ, तुम अब चोद दो मेरी इस चूत को यह साली तुम्हारे लंड के लिए बहुत तरसी है।


अब तुम जल्दी से इसको फाड़ दो क्यों तुम मुझे पागल किए जा रहे हो, जल्दी से अब मुझे वो मज़ा दे दो। दोस्तों अब वैसे मुझसे भी नहीं रुका जा रहा था और इसलिए मैंने भी उनकी बातों को सुनकर जोश में आकर अपना लंड एक ही झटके से अपनी आंटी की कसी हुई चूत में डाल दिया, वो दर्द की वजह से बड़ी धीरे से करहा उठी आईईईइ हाँ फाड़ डाल तू आज मेरी इस चूत को ऊफ़्फ़्फ़ तू मेरे दर्द की तरफ से बिल्कुल भी चिंता मत कर। अब मेरे लंड का टोपा उनकी चूत के अंदर जा चुका था और फिर थोड़ी देर बिना कोई हरकत किए ऐसे ही पड़े रहकर में उनके नरम रसभरे होंठो कों चूमते हुए अपनी आंटी के बूब्स के निप्पल को में सहलाता जा रहा था। अब वो भी बहुत गरम हो चुकी थी और फिर मैंने अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकालकर एक ज़ोर का धक्का मार दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड पूरा का पूरा अंदर जा पहुंचा। अब वो और भी ज़ोर से चिल्ला पड़ी ऊईईईई ऊफ्फ्फ्फ़ मार डाला रे फाड़ दी आईईईईई मेरी चूत। अब में कस कसकर धक्के लगाने लगा, जिसकी वजह से वो भी मस्त हो चुकी थी और वो पता नहीं क्या क्या बोल रही थी आईईईईई मार डाला जालिम तूने आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है। अब मेरे राजा तू मुझे और भी ज़ोर से धक्के देकर चोद, डालो हाँ ऐसे ही चोदो ऊह्ह्ह्ह ऊईईईईई तुम मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ आह्ह्ह्ह रहा है।
अब तक इतना मज़ा तो मुझे अपने पति के साथ भी कभी नहीं आया जो मज़ा मस्ती तूने आज मुझे देकर मेरा चुदाई का बुखार उतार दिया, हाँ और ज़ोर से डालो तुम आज फाड़ डालो मेरी इस चूत को साले कुत्ते में अब देखती हूँ तेरे लंड में कितना दम है। अब तू मुझे दिखा अपने लंड की ताकत मुझे मस्त मज़े दे। फिर में भी अपनी आंटी की वो बातें सुनकर पहले से ज्यादा जोश में आ गया था और यह बातें सुनकर मेरे धक्को की गति भी जोश के साथ साथ बढ़ गई, में उसको कहने लगा साली कुतिया अब तू चुप होकर देख में तुझे कैसे मज़े देता हूँ? तू चुपचाप रहकर बस मुझसे चुदवा मादरचोद साली रंडी आज में तेरी इस चूत को फाड़ दूंगा, तुझे वो मज़े दूंगा जिनको तू कभी नहीं भुला सकती, रंडी साली ले तू आज मेरे साथ अपनी इस चुदाई के जमकर मज़े में तुझे चोदने में अपनी तरफ से कोई कमी या कसर नहीं रखूंगा तू भी क्या याद रखेगी? अब वो मेरी यह बातें सुनकर और भी मस्त हो गयी, आईईईईई हाँ और चोदो मेरे राजा आहह्ह्ह वाह मज़ा आ गया रे और कसकर चोदो तुम मुझे फाड़ डालो आज मेरी इस चूत को ऊऊईईईई हाँ दो ऐसे ही तुम मुझे धक्के आईईईई माँ में मरी आह्ह्ह।

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दोस्तों अब मुझे उसकी लगातार धक्के देकर चुदाई करते हुए पूरे तीस मिनट हो चुके थे और इस बीच अब तक मेरी चुदक्कड़ आंटी दो बार झड़ चुकी थी और इसलिए मेरा लंड चिकना गीला होकर उसकी चूत में फिसलता हुआ बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था और मुझे मस्त मज़ा आ रहा था, लेकिन तभी मेरा ध्यान आंटी की गांड पर चला गया। अब धक्के की रफ्तार को कम करके मैंने गांड का छेद छुकर देखा वो बड़ा ही कसा हुआ लगा, हाथ लगाते ही आंटी ने अपनी गांड को सिकोड़ लिया। अब मैंने उसको पूछा क्या इरादा है? क्या गांड भी मारने का मौका भी मुझे नहीं दोगी? और वैसे भी बिना गांड मारे तो अब रहूँगा भी नहीं चाहे तुम मुझे कितना ही मना करो में तुम्हारी गांड तो आज जरुर मारूंगा। अब वो कहने लगी मेरे राजा जब तू मेरी गांड मारने की बात अपने मन में ठान ही चुका है तो फिर तू मुझसे क्या पूछता है? ले कर ले अपनी मर्जी के तू सभी काम वैसे भी तुझे अब कौन है यहाँ पर जो मना करेगा? और तू कौन सा मना करने से अब मान ही जाएगा तुझे तो अपनी मन मर्जी के काम करने है कर ले। फिर मैंने उनके मुहं से यह बात सुनकर अपना लंड उनकी चूत से बाहर निकाल लिया और उसको अपने सामने कुतिया की तरह खड़ा कर दिया।


अब उसकी गांड का गुलाबी छेद मुझे बिल्कुल साफ नजर आ रहा था, मेरा लंड उसकी चूत के पानी से पहले से ही गीला हो चुका था। अब मैंने उसकी गांड से अपने लंड को सटा दिया और हल्का सा धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा लंड दो इंच उनकी गांड में घुस गया और वो दर्द की वजह से ज़ोर से चिल्ला पड़ी आह्ह्हह् माँ में मर गई ऊफ्फ्फ्फ़ मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अब तुम इसको बाहर निकाल लो वरना में मर जाउंगी प्लीज अब बस भी करो, लेकिन मैंने उनकी एक भी बात नहीं सुनी और मैंने ज़ोर का एक धक्का लगा दिया। फिर उसकी वजह से मेरा लंड पूरा अंदर पहुंच गया और उसके बाद में धक्के लगाने लगा था। फिर करीब दस मिनट के बाद वो थोड़ा सा दर्द कम होने की वजह से शांत हो गयी और अब उसको भी मेरे धक्को से मज़ा आ रहा था और इसलिए वो जोश में आकर सिसकियाँ लेने लगी थी, आह्ह्ह्ह ऊऊईई वाह इसमे तो मुझे चूत से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा है हाँ और ज़ोर से डालो जाने दो पूरा अंदर मेरे राजा ऊफ्फ्फ मुझे बहुत मज़ा आ रहा है आईईई। अब में उसकी बातें सुनकर जोश में आकर उसको तेज धक्के देकर चोदता ही जा रहा था।
फिर करीब बीस मिनट तक मैंने उसको लगातार धक्के देकर चोदा और अब मेरा झड़ने का समय हो चुका था और इसलिए मैंने भी अपनी गति को अब पहले से ज्यादा बढ़ा दिया, में उसको कहने लगा साली वाह क्या मस्त गांड है तेरी? अब तो तू मेरी हो चुकी है। अब में रोज ही तेरी कसकर ऐसे ही चुदाई किया करूँगा, साली रंडी तू बहुत मस्त औरत है वाह मज़ा आ गया उऊईईई मेरा निकलने वाला है और फिर मेरा पानी उनकी गांड में निकल गया। फिर मैंने धक्को के साथ अपना पूरा वीर्य उनकी गांड में पूरा अंदर तक डाल दिया और हम दोनों उसके बाद बहुत देर तक एक दूसरे से चिपककर वैसे ही लेटे रहे, कुछ देर बाद में उठा और अब मैंने अपने कपड़े पहन लिए वो मुझसे बोली कि राजा अब तो तुझे तेरे साथ मेरी रोज हर दिन ही चुदाई करनी पड़ेगी। फिर मैंने उसको कहा कि हाँ ठीक है, में वैसा ही करूँगा मेरी रानी जैसा आज से तुम मुझसे कहोगी, में अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रहने दूंगा और उसके बाद मैंने दोबारा उसको बहुत जमकर चोदा। फिर इस बार मैंने उसकी चूत में अपना पूरा वीर्य निकाल दिया वो मेरे हर एक धक्के से खुश होकर अपनी गांड को ऊपर उठाकर मेरा साथ दे रही थी।


दोस्तों ऐसा उसने अपनी हर बार की चुदाई में किया, वो हमेशा मेरा ऐसे ही साथ देकर मेरे साथ चुदाई के मस्त मज़े लेती और में खुश होकर उसकी चुदाई करके वापस अपने घर चला आता, ऐसा हम दोनों के बीच बहुत समय तक चला और उन सभी मौको का हमने पूरा पूरा फायदा उठाकर मस्त मज़ेदार चुदाई के मज़े लिए जिसकी वजह से हम दोनों ही खुश रहने लगे थे। दोस्तों यह थी मेरी सच्ची चुदाई की घटना मुझे उम्मीद है कि आप सभी को मेरी यह कहानी पढ़कर जरुर मज़ा आएगा ।।
धन्यवाद …

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